‌‌‌‌ Go Green - Tree plantation in Islam

 Go Green/Islam and environment/Tree plantation in Islam.


अक्सर हमारे यहाँ सिर्फ नमाज़/रोज़ा/हज/ज़कीत और तसबीह तिलावत को ही दीन/इस्लाम समझा जाता है। और दरख्त लगाना, माहौल को साफ  रखना इसको अच्छा काम तो समझा जाता है पर दीन/इस्लाम नही समझा जाता। और फिर जो यह काम करता है उसको दुनयादारी समझा जाता है।

तो इसी टॉपिक पर निचे 7 हदीसें पेश है।

1. दरख्त लगाना दुन्या दारी नही - हजरत कासिम रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दमिश्क में हजरत अबुर्दा के पास से एक शख़्त गुजरे। उस वक़्त हज़रत अबुर्दा कोई पौधा लगा रहे थे। उस शख्स ने अबुर्दा से कहा क्या आप भी ये (दुन्यावी) काम कर रहे हैं, हालांकि आप तो रसूलुल्लाह के सहाबी हैं। हजरत अबुद्दर्दाने फ़रमाया : मुझे मलामत करने में जल्दी न करो। मैंने रसूलुल्लाह को यह इरशाद फ़रमाते हुए सुना जो शख़्स पौधा लगाता है और उसमें से कोई इंसान या अल्लाह तआला की मख़्तूक़ में से कोई मख्लूक खाती है तो वह उस (पौदा लगाने वाले) के लिए सदक़ा होता है। (मुस्नद अहमद)।

2. कयामत करीब और दरख्त लगाना -

अगर कयामत आ जाए और आपके हाथ में एक पौधा है और उसको ज़मीन में लगाना मुमकिन है तो कयामत आने के पहले उसको लगा दो। (अल आदाब अल मुनफरद, इमाम बुखारी-479)


3. चोरी होने पर भी सवाब - हजरत जाबिर रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया : जो मसुलमान दरख्त लगाता है, उसमें से जितना हिस्सा खा लिया जाए वह दरख्त लगाने वाले के लिए सदक़ा हो जाता है और जो उसमें से चुरा लिये जाए वह भी सदक़ा हो जाता है, यानी उस पर भी मालिक को सदके का सवाब मिलता है और जितना हिस्सा उसमें से दरिन्दे खा लेते हैं वह भी उसके लिए सदक़ा हो जाता है और जितना हिस्सा उसमें से परिन्दे खा लेते हैं वह भी उसके लिए सदक़ा हो जाता है। (गरज यह कि) जो कोई उस दरख्त में से कुछ (भी फल वगैरह ) कम कर देता है, तो वह उस (दरख्त लगाने वाले) के लिए सदक़ा हो जाता है। (मुस्लिम)

4. सवाब-जारीया - हज़रत अबू ऐय्यूब अन्सारी रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया जो शख़्स पौधा लगता है फिर उस दरख्त से जितना फल पैदा होता है अल्लाह तआला फल की पैदावार के बक़द्र पौधा लगाने वाले के लिए अज लिख देते हैं।

(मुस्नद अहमद)

5. बंजर ज़मीन - हजरत जाबिर रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया : जो शख्स बन्जर जमीन की खेती के काबिल बनाता है तो उसे उसका अजर(सवाब) मिलता है।

6. जंग के दौरान भी पेड़ काटने पर रोक।

इमाम बैहकी ने रिवायत किया है कि सईद बी. अल-मुसैयब (रदियल्लाहु अन्हु) ने बताया कि हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (रदियल्लाहु अन्हु) हमेशा इस्लामिक सेना को जिहाद के लिए भेजते समय कहते थे, "खजूर के पेड़ों को मत डुबोओ या जलाओ। फल देने वाले दरख्त को मत काटो। एक चर्च को मत तोड़ो। और किसी बच्चे या बूढ़े या औरत को मत मारो… ” ►{अल-सुनान अल कुब्रा 9:85 हदीस #17904 में बैहाकी द्वारा वर्णित

7. दरख्त काटने पर जहन्नम

मुआविया इब्न जायदा से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "जो लोटे(lotte/बेरी) के पेड़ को काटता है, अल्लाह तआला उसे सिर के बल जहन्नम में झोंक देगा।

बैहक़ी से रिवायत, 6/141; अल-सिलसिला अल-साहिहाह, 615 में शेख अल-अलबानी द्वारा हसन बताई गई।

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